
आप बिल भरने जाते हैं और बैंक पेमेंट रोक देता है। ब्रांच बताती है कि आपका खाता “साइबर पुलिस के निर्देश पर” फ्रीज़ किया गया है, अक्सर किसी दूसरे राज्य के थाने से, और बैंक कुछ नहीं कर सकता। मुंबई में हज़ारों लोगों के साथ ऐसा होता है: UPI से पैसे लेने वाले दुकानदार, फ्रीलांसर, ऑनलाइन कुछ बेचने वाले, या कोई भी जिसके खाते में ऐसा पैसा आया जो कई ट्रांसफ़र पहले किसी धोखाधड़ी से जुड़ा था। यह गाइड बताती है कि महाराष्ट्र में अब कानून क्या कहता है और क्रम से क्या करना चाहिए।
मुख्य बातें
- लियन और फ्रीज़ का फ़र्क
- लियन सिर्फ़ तय रकम रोकता है; डेबिट फ्रीज़ पूरा खाता रोक देता है
- बॉम्बे हाई कोर्ट
- पुलिस धारा 106 BNSS के तहत खाता डेबिट-फ्रीज़ नहीं कर सकती; इसके लिए धारा 107 के तहत मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए (नवंबर 2025)
- बैंक
- सिर्फ़ विवादित रकम पर लियन लगा सकते हैं, जब तक सक्षम प्राधिकारी इससे ज़्यादा का आदेश न दे
- शिकायत का रास्ता
- गृह मंत्रालय की जनवरी 2026 की प्रक्रिया: बैंक 7 दिन में आपकी शिकायत आगे भेजता है, फिर जांच अधिकारी, ज़िला और राज्य शिकायत अधिकारी
- अगर आपके साथ ठगी हुई है
- 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
खाते फ्रीज़ क्यों होते हैं
जब कोई ठगी का शिकार व्यक्ति 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर नुकसान की शिकायत करता है, तो पैसे को सिटीज़न फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड्स रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के ज़रिए एक खाते से दूसरे खाते तक ट्रेस किया जाता है। जिस भी खाते से पैसा गुज़रा, उस पर निशान लग सकता है, चाहे वह पाँच या दस ट्रांसफ़र बाद हो और खाताधारक को ठगी की कोई जानकारी न हो। फिर पुलिस बैंक को नोटिस भेजती है, आमतौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 106 का हवाला देकर, जिसने पुरानी CrPC की धारा 102 की जगह ली है।
ज़्यादातर प्रभावित लोगों पर कोई आरोप नहीं होता। उनके खाते में बस ऐसा पैसा आया था जिसका संबंध किसी शिकायत से निकला।
अदालतों ने क्या कहा है
बॉम्बे हाई कोर्ट: धारा 106 के तहत डेबिट फ्रीज़ नहीं
कार्तिक योगेश्वर चतुर बनाम भारत संघ में, 20 नवंबर 2025 को नागपुर बेंच (न्यायमूर्ति अनिल एल. पानसरे और राज डी. वाकोडे) ने कहा कि जांच एजेंसी को धारा 106 BNSS के तहत बैंक खाता अटैच या डेबिट-फ्रीज़ करने का अधिकार नहीं है। धारा 106 ज़ब्ती की शक्ति है, जैसे सबूत के तौर पर। पीड़ित के लिए पैसा रोकने हेतु खाता फ्रीज़ करना अटैचमेंट है, जो धारा 107 BNSS के तहत आता है और इसके लिए मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए। कोर्ट ने फ्रीज़ के आदेश रद्द किए, कहा कि बैंक सिर्फ़ विवादित रकम पर लियन लगा सकते हैं, और खाताधारकों को मुआवज़ा मांगने की छूट दी।
यह बॉम्बे हाई कोर्ट का फ़ैसला है, इसलिए महाराष्ट्र की पुलिस और अदालतों पर लागू होता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट: सिर्फ़ विवादित रकम पर लियन
जनवरी 2026 में (खालसा मेडिकल स्टोर बनाम रिज़र्व बैंक) इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पूरे खाते को फ्रीज़ करना अनुचित है: पुलिस को वह खास रकम बतानी होगी जिसे अपराध की कमाई माना जा रहा है, और सिर्फ़ उसी पर लियन मांगना होगा। अगस्त 2026 में (रितेश यादव बनाम रिज़र्व बैंक) कोर्ट ने एक बैंक को खाता खोलने और सिर्फ़ विवादित ₹36,000 पर लियन रखने का आदेश दिया, और बैंकों को गृह मंत्रालय की शिकायत प्रक्रिया शाखाओं और ऑनलाइन दिखाने का निर्देश दिया।
कर्नाटक हाई कोर्ट: अलग राय
अगस्त 2026 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस धारा 106 BNSS के तहत बिना कोर्ट आदेश के खाता डेबिट-फ्रीज़ कर सकती है, बशर्ते मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट करे। यानी हाई कोर्टों की राय अलग है और यह सवाल आगे सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। महाराष्ट्र में बॉम्बे हाई कोर्ट की राय लागू होती है। अगर आपका खाता दूसरे राज्य की पुलिस ने फ्रीज़ किया है, तो उस राज्य की अदालतें अपने हाई कोर्ट की राय मान सकती हैं।
क्या करें, क्रम से
- बैंक से लिखित में पूछें: किस थाने या एजेंसी ने कहा, शिकायत या एक्नॉलेजमेंट नंबर, नोटिस की तारीख, और क्या यह तय रकम पर लियन है या पूरे खाते का फ्रीज़। अपने पत्र या ईमेल की कॉपी रखें।
- जांच अधिकारी से संपर्क करें: लेनदेन समझाएं और सबूत भेजें: बिल, खरीदार से ऑर्डर या चैट, आपका UPI या बैंक स्टेटमेंट और पहचान पत्र। अधिकारी को भरोसा हो जाए कि आप असली प्राप्तकर्ता हैं तो कई लियन हटा दिए जाते हैं।
- शिकायत प्रक्रिया अपनाएं: गृह मंत्रालय की जनवरी 2026 की मानक प्रक्रिया के तहत आप अपने बैंक के पास जाते हैं; बैंक जांच के बाद आपकी शिकायत सात दिन के भीतर CFCFRMS शिकायत मॉड्यूल में भेजता है। फिर यह जांच अधिकारी, ज़िला शिकायत अधिकारी और अपील में राज्य शिकायत अधिकारी के पास जाती है।
- मजिस्ट्रेट के पास आवेदन: लियन या फ्रीज़ जारी रहे तो उस मामले पर अधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट के पास रकम छुड़ाने या फ्रीज़ को विवादित रकम तक सीमित करने का आवेदन दिया जा सकता है। यह कोर्ट अक्सर उस राज्य में होता है जहां शिकायत दर्ज हुई।
- हाई कोर्ट में रिट याचिका: अगर मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना पूरा खाता फ्रीज़ है, या लियन विवादित रकम से बहुत ज़्यादा है, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका वह उपाय है जो बॉम्बे और इलाहाबाद के मामलों में सफल रहा।
क्या न करें
- “जान-पहचान” से खाता खुलवाने का वादा करने वाले किसी को पैसे न दें। राहत सिर्फ़ जांच अधिकारी, शिकायत अधिकारी या कोर्ट से मिलती है।
- हाज़िर होने या कागज़ देने वाले पुलिस नोटिस को नज़रअंदाज़ न करें। धारा 35 BNSS का नोटिस मिला हो तो पुलिस नोटिस मिलने पर क्या करें पढ़ें (अंग्रेज़ी)।
- जल्दबाज़ी में विवादित पैसा दूसरे खाते से न हटाएं और खाता बंद न करें। इससे लगता है कि आप पैसा छिपा रहे हैं।
कौन से कागज़ तैयार रखें
- उस अवधि के बैंक स्टेटमेंट, जिसमें संदिग्ध जमा पर निशान हो
- बिल, डिलीवरी का सबूत, भुगतान करने वाले व्यक्ति से चैट या ईमेल
- आपका PAN, आधार और व्यवसाय पंजीकरण (GST या गुमास्ता), अगर हो
- बैंक और पुलिस को भेजे हर पत्र की कॉपी, पावती के साथ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बैंक कहता है वह कुछ नहीं बता सकता। क्या यह सही है?
बैंक को कम से कम यह बताना चाहिए कि किस एजेंसी ने फ्रीज़ कहा और उससे कैसे संपर्क करें, ताकि आप जांच अधिकारी तक पहुंच सकें। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बैंकों को शिकायत प्रक्रिया शाखाओं और ऑनलाइन दिखाने का निर्देश दिया है।
सिर्फ़ ₹5,000 विवादित थे। पूरा खाता क्यों बंद है?
बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार पुलिस धारा 106 BNSS के तहत पूरा खाता डेबिट-फ्रीज़ नहीं कर सकती, और बैंक सिर्फ़ विवादित रकम पर लियन रख सकते हैं, जब तक सक्षम प्राधिकारी कुछ और आदेश न दे। आप बैंक और अधिकारी से लियन को विवादित रकम तक सीमित करने को कह सकते हैं, और मना करने पर कोर्ट जा सकते हैं।
थाना दूसरे राज्य में है। क्या वहां जाना पड़ेगा?
अक्सर शुरुआती कदम, यानी बैंक और अधिकारी को लिखना और शिकायत प्रक्रिया, मुंबई से ही हो सकते हैं। कोर्ट का आवेदन वहां दाखिल करना पड़ सकता है जहां केस दर्ज है, जबकि रिट याचिका कभी-कभी बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल हो सकती है; कौन सा रास्ता सही है, यह तथ्यों पर निर्भर है।
मेरे साथ ठगी हुई है। क्या यह सही पेज है?
नहीं। देखें ऑनलाइन या UPI ठगी: पहले घंटों में क्या करें (अंग्रेज़ी)।
एडवोकेट तमन्ना सईद शेख़ मालवणी, मलाड (पश्चिम) में चैंबर्स वाली महिला अधिवक्ता हैं। परामर्श हिंदी, उर्दू, मराठी और अंग्रेज़ी में पहले से समय लेकर होता है। समय तय करने के लिए +91 99301 50560 पर कॉल करें या WhatsApp संदेश भेजें।
यह गाइड अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट हुए अदालती फ़ैसलों पर आधारित सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। इस क्षेत्र में कानून तेज़ी से बदल रहा है।