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निजी न्यास बनाम सार्वजनिक न्यास महाराष्ट्र: कौन सा पंजीकृत करें (हिंदी)

लोग "ट्रस्ट" कहते समय दो अलग चीज़ों की बात करते हैं: परिवार के सदस्यों के लिए बनाया गया निजी न्यास और धार्मिक या धर्मादाय उद्देश्य के लिए सार्वजनिक न्यास। दोनों अलग कानूनों से चलते हैं और केवल एक ही…

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लोग “ट्रस्ट” कहते समय दो अलग चीज़ों की बात करते हैं: परिवार के सदस्यों के लिए बनाया गया निजी न्यास और धार्मिक या धर्मादाय उद्देश्य के लिए सार्वजनिक न्यास। दोनों अलग कानूनों से चलते हैं और केवल एक ही धर्मादाय आयुक्त के पास पंजीकृत होता है।

सार्वजनिक न्यास

महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के अनुसार सार्वजनिक न्यास वह है जो सार्वजनिक धार्मिक या धर्मादाय उद्देश्य, या दोनों के लिए हो (धारा 2(13))। इसे धर्मादाय आयुक्त के कार्यालय में पंजीकृत कराना होता है (धारा 18), और फिर उस पर निगरानी रहती है: खाते, ऑडिट, चेंज रिपोर्ट और कुछ संपत्ति लेन-देन की अनुमति। प्रक्रिया सार्वजनिक न्यास पंजीकरण कैसे करें में है।

निजी न्यास

निजी न्यास नामित लाभार्थियों, आमतौर पर परिवार के सदस्यों, के लिए संपत्ति रखने हेतु बनाया जाता है और भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 से चलता है। उस अधिनियम की धारा 5 कहती है कि अचल संपत्ति के संबंध में कोई न्यास तब तक वैध नहीं है जब तक वह न्यास के लेखक या न्यासी द्वारा हस्ताक्षरित, पंजीकृत, गैर-वसीयती लिखित दस्तावेज़ से, या लेखक की वसीयत से घोषित न किया गया हो। चल संपत्ति के न्यास को उसी तरह घोषित करना होता है या संपत्ति का स्वामित्व न्यासी को हस्तांतरित करना होता है। व्यवहार में, फ्लैट या ज़मीन रखने वाले पारिवारिक न्यास के लिए पंजीकृत विलेख चाहिए।

भारतीय न्यास अधिनियम धर्मादाय न्यासों पर लागू नहीं होता

भारतीय न्यास अधिनियम की धारा 1 कहती है कि इसमें कुछ भी सार्वजनिक या निजी धार्मिक या धर्मादाय बंदोबस्तों पर लागू नहीं होता। इसलिए धर्मादाय न्यास निजी न्यास नहीं है और दोनों के नियमों को मिलाना नहीं चाहिए।

आपको कौन सा चाहिए?

प्रश्न निजी न्यास सार्वजनिक न्यास
उद्देश्य नामित व्यक्तियों, जैसे परिवार, का लाभ सार्वजनिक धार्मिक या धर्मादाय उद्देश्य
मुख्य कानून भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950
कहाँ पंजीकृत उप-निबंधक के पास, जहाँ (अचल संपत्ति के लिए) दस्तावेज़ का पंजीकरण होना चाहिए धर्मादाय आयुक्त
निगरानी धर्मादाय आयुक्त द्वारा नहीं हाँ: खाते, ऑडिट, चेंज रिपोर्ट

अगर आपका उद्देश्य स्कूल, चिकित्सा सहायता समूह, मंदिर या जनता के लिए खुला सामुदायिक कोष चलाना है, तो आप सार्वजनिक न्यास के दायरे में हैं। अगर उद्देश्य बच्चों या माता-पिता के लिए पारिवारिक संपत्ति सँभालना है, तो निजी न्यास ठीक हो सकता है, हालाँकि कभी-कभी वसीयत या गिफ्ट डीड बेहतर काम करती है। देखें मुंबई में वसीयत बनवाना और गिफ्ट डीड।

न्यास या सोसायटी?

अगर काम धर्मादाय है पर आप सदस्यता वाला ढाँचा चाहते हैं, तो सोसायटी दूसरा विकल्प है: सार्वजनिक न्यास बनाम सोसायटी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या निजी न्यास को धर्मादाय आयुक्त की ज़रूरत है?

नहीं। धर्मादाय आयुक्त सार्वजनिक न्यास अधिनियम के तहत सार्वजनिक न्यास पंजीकृत करता है।

क्या एक साधारण पत्र से न्यास बन सकता है?

अचल संपत्ति के लिए धारा 5 पंजीकृत दस्तावेज़ माँगती है, इसलिए केवल पत्र काफ़ी नहीं है।

चुनने और विलेख बनाने में मदद के लिए मुंबई में न्यास पंजीकरण सहायता देखें।

यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। कर व्यवहार और स्टांप ड्यूटी विलेख और संपत्ति पर निर्भर करते हैं, इसलिए अपने तथ्यों पर सलाह लें।

स्रोत: भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (धारा 1 और 5); महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 (धारा 2(13) और 18)।

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