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सार्वजनिक न्यास पंजीकरण महाराष्ट्र: चरण-दर-चरण (हिंदी)

आप महाराष्ट्र में कोई धर्मादाय या धार्मिक न्यास बनाना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि क्या तैयार करना है, आवेदन कहाँ करना है और आवेदन जमा करने के बाद क्या होता है। यह मार्गदर्शिका धर्मादाय आयुक्त की…

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आप महाराष्ट्र में कोई धर्मादाय या धार्मिक न्यास बनाना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि क्या तैयार करना है, आवेदन कहाँ करना है और आवेदन जमा करने के बाद क्या होता है। यह मार्गदर्शिका धर्मादाय आयुक्त की प्रकाशित प्रक्रिया और महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के अनुसार क्रमवार जानकारी देती है।

पहले देखें: क्या यह सार्वजनिक न्यास है?

अधिनियम की धारा 2(13) के अनुसार सार्वजनिक न्यास वह न्यास है जो सार्वजनिक धार्मिक या धर्मादाय उद्देश्य, या दोनों के लिए हो। केवल अपने परिवार के लिए बनाया गया न्यास अलग है। अगर आप न्यास और सोसायटी में उलझे हैं, तो सार्वजनिक न्यास बनाम सोसायटी पढ़ें।

पंजीकरण कौन कराता है, कहाँ और कब तक

  • आवेदन करना न्यासी (ट्रस्टी) का कर्तव्य है (धारा 18(1))।
  • आवेदन उस क्षेत्र के उप या सहायक धर्मादाय आयुक्त को जाता है जहाँ न्यास का कार्यालय है या जहाँ उसकी संपत्ति या उसका बड़ा हिस्सा स्थित है (धारा 18(2))।
  • अधिनियम लागू होने के बाद बने न्यास के लिए आवेदन उसके गठन के तीन महीने के भीतर करना होता है (धारा 18(4))।

चरण 1: नाम चुनें

धर्मादाय आयुक्त की मार्गदर्शिका के अनुसार नाम किसी देश, राज्य, सरकारी निकाय या स्थानीय प्राधिकरण के नाम जैसा नहीं होना चाहिए और Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950 में वर्जित नाम नहीं होना चाहिए। पोर्टल पर “नाम उपलब्धता जाँचें” बटन है। विलेख अंतिम करने से पहले इसका उपयोग करें।

चरण 2: दस्तावेज़ तैयार करें

पोर्टल पर स्कैन किए गए दस्तावेज़ अपलोड करने होते हैं (मार्गदर्शिका के अनुसार 150 DPI, श्वेत-श्याम)। मार्गदर्शिका की सूची:

  1. न्यास का आवेदन
  2. न्यासियों का सहमति पत्र
  3. मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन
  4. न्यास बनाने वाला दस्तावेज़ (न्यास विलेख)
  5. सभी न्यासियों के पते का प्रमाण
  6. सभी न्यासियों के पहचान का प्रमाण
  7. न्यास कार्यालय के पते के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र
  8. न्यास कार्यालय के पते का प्रमाण
  9. न्यासी मंडल का प्राधिकार पत्र
  10. मंडल के प्रस्ताव की प्रति
  11. स्व-घोषणा
  12. वकालतनामा, यदि वकील उपस्थित हो
  13. समाचारपत्र में प्रकाशन से छूट का आवेदन (₹10 का कोर्ट फीस स्टांप लगाकर)
  14. अनुसूची 1, 2 और 6
  15. न्यास के नियम और विनियम या संविधान
  16. कोई अन्य दस्तावेज़

दस्तावेज़ों को एक जैसा रखने के सुझावों के लिए पंजीकरण दस्तावेज़ कैसे तैयार करें देखें।

चरण 3: ऑनलाइन आवेदन भरें

  1. धर्मादाय आयुक्त के पोर्टल (charity.maharashtra.gov.in) पर नया उपयोगकर्ता बनकर लॉग इन करें।
  2. “Register Trust” चुनें और “Check name availability” का उपयोग करें।
  3. आवेदक का विवरण भरें (मार्गदर्शिका में आधार और पैन का उल्लेख है) और न्यासी जोड़ें। कम से कम एक न्यासी आवश्यक है, अधिकतम की सीमा नहीं।
  4. न्यासियों के उत्तराधिकार का तरीका, जैसा विलेख में लिखा है, बताएँ।
  5. न्यास के उद्देश्य और न्यास बनाने वाला दस्तावेज़ चुनें।
  6. यदि न्यास के पास संपत्ति या आय है तो संपत्ति का विवरण, आय के स्रोत और वार्षिक आय भरें।
  7. दस्तावेज़ अपलोड करें; रुकना हो तो ड्राफ्ट के रूप में सहेजें।
  8. ऑनलाइन या ऑफलाइन भुगतान चुनकर जमा करें। आपको SRN (आवेदन संदर्भ संख्या) मिलेगा।

धारा 18(5) के अनुसार आवेदन में न्यास का नाम, न्यासियों और प्रबंधक (यदि हो) के नाम-पते, उत्तराधिकार का तरीका, चल-अचल संपत्ति की सूची और मोटा मूल्य, औसत वार्षिक आय और व्यय तथा पत्र-व्यवहार का पता देना होता है। आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाले हर व्यक्ति को गंभीर प्रतिज्ञान (solemn affirmation) किसी अधिकृत अधिकारी, जैसे उप या सहायक धर्मादाय आयुक्त, शांति न्यायाधीश, कार्यकारी मजिस्ट्रेट या नोटरी के सामने करना होता है (Bombay Public Trusts Rules, 1951 का नियम 6(4))।

चरण 4: 30 दिनों के भीतर उपस्थित हों

मार्गदर्शिका के अनुसार ऑनलाइन जमा करने के बाद आवेदक, प्रतिनिधि या वकील को सभी मूल दस्तावेज़ों के साथ 30 दिनों के भीतर उपस्थित होना होता है। ऑफलाइन भुगतान चुना हो तो शुल्क उसी अवधि में न्यास कार्यालय में भरना होता है।

इसके बाद: जाँच (इन्क्वायरी)

पंजीकरण अपने आप नहीं होता। अधिकारी धारा 19 के तहत जाँच करता है कि न्यास का अस्तित्व है या नहीं, वह सार्वजनिक न्यास है या नहीं, न्यासी कौन हैं, संपत्ति कैसे धारित है और आय-व्यय क्या है। जाँच की सार्वजनिक सूचना दी जाती है (नियम 7A), जैसे समाचारपत्र में विज्ञापन और कार्यालय की सूचना पट्टिका पर नोटिस, और आपत्तियाँ आम तौर पर अंतिम प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर मानी जाती हैं। फिर अधिकारी निष्कर्ष दर्ज करता है (धारा 20) और यदि यह सार्वजनिक न्यास पाया जाए तो उसे रजिस्टर में दर्ज करता है। अधिनियम सबके लिए एक निश्चित दिन-सीमा तय नहीं करता, इसलिए समय कार्यालय और आपत्तियों पर निर्भर करता है।

पंजीकरण के बाद

खर्च के बारे में जानने के लिए सार्वजनिक न्यास पंजीकरण का खर्च पढ़ें। विलेख और आवेदन में सहायता के लिए मुंबई में न्यास पंजीकरण सहायता देखें।

यह सामान्य जानकारी है, आपकी स्थिति के लिए कानूनी सलाह नहीं। दाखिल करने से पहले पोर्टल की वर्तमान प्रक्रिया जाँच लें।

स्रोत: महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 (धारा 2(13), 18, 19, 20); Bombay Public Trusts Rules, 1951 (नियम 6 और 7A); धर्मादाय आयुक्त, महाराष्ट्र की न्यास पंजीकरण नागरिक मार्गदर्शिका (charity.maharashtra.gov.in)।

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