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महिलाओं के लिए तलाक: मुंबई में प्रक्रिया, गुज़ारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और स्त्रीधन (हिंदी)

मुंबई में महिलाओं के लिए तलाक की प्रक्रिया सरल हिंदी में: आपसी सहमति या विवादित तलाक, मुस्लिम महिलाओं के रास्ते, गुज़ारा भत्ता कितना मिलता है, बच्चों की कस्टडी, स्त्रीधन और ज़रूरी कागज़।

Illustration: a woman advocate advising a woman with a checklist, a jewellery box and a child picture book

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शादी टूटने की स्थिति में महिलाओं के मन में कई सवाल होते हैं: तलाक कैसे होगा, गुज़ारा भत्ता कितना मिलेगा, बच्चे किसके पास रहेंगे, और गहने व सामान (स्त्रीधन) वापस कैसे मिलेगा। यह गाइड सरल हिंदी में मुंबई की प्रक्रिया समझाती है।

मुख्य बातें

तलाक का केस
फैमिली कोर्ट, मुंबई, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC)
आपसी सहमति से तलाक
कम से कम एक साल अलग रहना; छह महीने का इंतज़ार उचित मामलों में माफ़ हो सकता है
गुज़ारा भत्ता
धारा 144 BNSS (किसी भी धर्म की महिला), हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और 25, घरेलू हिंसा अधिनियम
बच्चे
कस्टडी बच्चे के हित के आधार पर तय होती है; पाँच साल से छोटा बच्चा सामान्यतः माँ के पास रहता है
स्त्रीधन
गहने और उपहार महिला की अपनी संपत्ति हैं

तलाक के रास्ते

  • आपसी सहमति से तलाक: पति-पत्नी दोनों राज़ी हों तो फैमिली कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर होती है, जिसमें गुज़ारा भत्ता, बच्चे और स्त्रीधन की शर्तें तय होती हैं।
  • पति राज़ी न हो तो: क्रूरता, दो साल से छोड़ देना (परित्याग) या व्यभिचार जैसे आधार पर तलाक का मुकदमा। नोटिस के बाद पति न आए तो केस उसके बिना भी आगे बढ़ सकता है।
  • मुस्लिम महिलाएँ: खुला, मुबारात, और मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के तहत कोर्ट से तलाक, जैसे दो साल तक भरण-पोषण न देने या क्रूरता के आधार पर। एक साथ तीन तलाक अमान्य है। 1939 अधिनियम के आधार (अंग्रेज़ी)।

केस के दौरान सुरक्षा और पैसा

  • घर में रहने का अधिकार: घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत महिला को साझा घर से कानून के बिना निकाला नहीं जा सकता।
  • अंतरिम गुज़ारा भत्ता और मुकदमे का खर्च केस चलते समय माँगा जा सकता है।
  • कितना? कोई तय फ़ॉर्मूला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पति के शुद्ध वेतन का 25% उचित माना है (2017), और दोनों पक्षों को अपनी आय और संपत्ति का हलफ़नामा देना होता है (राजनेश बनाम नेहा, 2020)। गुज़ारा भत्ता सामान्यतः आवेदन की तारीख से मिलता है। विस्तार से (अंग्रेज़ी)।
  • हिंसा हो तो तुरंत 112 पर कॉल करें। घरेलू हिंसा का केस कैसे दर्ज करें।

पहले से कौन से कागज़ जमा करें

  1. विवाह प्रमाणपत्र या निकाहनामा, शादी की तस्वीरें
  2. अपना आधार, पैन और पते का प्रमाण; बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र
  3. पति की आय का सबूत: सैलरी स्लिप, आयकर रिटर्न, बैंक या व्यापार के कागज़
  4. स्त्रीधन की सूची: किसने क्या दिया, तस्वीरें, बिल
  5. क्रूरता या हिंसा के सबूत: मैसेज, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस शिकायत

कागज़ों की कॉपी किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास या ऐसे ईमेल में रखें जिसका पासवर्ड सिर्फ़ आपके पास हो। पूरी चेकलिस्ट (अंग्रेज़ी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पति के मुंबई से बाहर रहने पर भी मैं मुंबई में केस कर सकती हूँ?

सामान्यतः याचिका वहाँ दायर हो सकती है जहाँ शादी हुई, जहाँ पति-पत्नी आखिरी बार साथ रहे, या जहाँ पत्नी रह रही है।

तलाक में कितना समय लगता है?

आपसी सहमति से तलाक, इंतज़ार की अवधि माफ़ होने पर, कुछ महीनों में हो सकता है। विवादित तलाक में ज़्यादा समय लगता है।

क्या मुझे कोर्ट में पति का सामना करना पड़ेगा?

फैमिली कोर्ट में पहले काउंसलिंग और मध्यस्थता होती है। कई तारीखों पर सिर्फ़ वकील की उपस्थिति काफ़ी होती है।

एडवोकेट तमन्ना सईद शेख़ मालवणी, मलाड (पश्चिम) में चैंबर्स वाली महिला अधिवक्ता हैं। परामर्श हिंदी, उर्दू, मराठी और अंग्रेज़ी में पहले से समय लेकर होता है। समय तय करने के लिए +91 99301 50560 पर कॉल करें या WhatsApp संदेश भेजें।

यह गाइड अक्टूबर 2026 की सामान्य कानूनी स्थिति बताती है। यह कानूनी सलाह नहीं है; आपके मामले में क्या लागू होगा, यह तथ्यों पर निर्भर है।

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